बेफ़ीज़ूल में आखों का नम होना मुनासिब नहीं
ख़ामख़ा ही नाराज़ है दुनिया - दुनिया वालों से ;
क्यों लिखते हो ये ग़ज़ल , ये कहानियाँ ग़म के?
दुनिया की ही शिकायत करते हो - दुनिया वालों से ।
🪻🪻🪻
🪻🪻🪻
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